संक्रमण के इस दौर मे घुटन तो होगी ही !!!!
दिन हो ...महीना हो ..या साल हो ..ऐसे ही समय गुजरता जाता है. गुजरते हुए समय का हर लम्हा संक्रमण का काल कहा जाता है. और ऐसे हर काल के बर्तमान मे रहने वाले को घुटन होती है.
कारण ये है कि हम या तो भविष्य मे रहते है या भूत मे. ऐसे मे हम अपने आस-पास की बातों से अनजान रहते है. आज हम अपने पडोसी का हाल-चाल और नाम जानने के बजाये समुंदरपार हमारे किसी दूर के रिश्तेदार और नातेदार के बारे मे चर्चा करते हुए समय बिताते हुए दिखाई देते है जो कि वर्तमान के कम ही प्रासंगिक है.
दरअसल हमारे आस-पास की ज्यादेतर समस्याओ का समाधान इस सूत्र मे ही हो सकता है की हर व्यक्ति बजाये इसके कि दुसरे क्या करते है पर ध्यान देने के इस बात पर ध्यान दे की वो खुद क्या कर सकता है ...और क्या कर रहा है.
कारण ये है कि हम या तो भविष्य मे रहते है या भूत मे. ऐसे मे हम अपने आस-पास की बातों से अनजान रहते है. आज हम अपने पडोसी का हाल-चाल और नाम जानने के बजाये समुंदरपार हमारे किसी दूर के रिश्तेदार और नातेदार के बारे मे चर्चा करते हुए समय बिताते हुए दिखाई देते है जो कि वर्तमान के कम ही प्रासंगिक है.
दरअसल हमारे आस-पास की ज्यादेतर समस्याओ का समाधान इस सूत्र मे ही हो सकता है की हर व्यक्ति बजाये इसके कि दुसरे क्या करते है पर ध्यान देने के इस बात पर ध्यान दे की वो खुद क्या कर सकता है ...और क्या कर रहा है.
तथ्य यह है कि जब समय हमारे लिए नहीं रुकता है तो क्यों हम समय का इंतज़ार करे और हाथ पर हाथ धर कर बैठे रहे कि सरकार और या कोई दुसरा व्यक्ति हमारी समस्याओं का समाधान करेगा...........
आखिर कब तक हम इस प्रश्न का उत्तर ढूढ़ते मे रत रहेंगे कि अभी हमारी उम्र ही नहीं ये सब कुछ करने की ...या अभी मेरे पास आर्थिक क्षमता नहीं है समाज के लिए कुछ करने के लिए. जब सब कुछ होगा तब मै कुछ करूँगा समाज के लिए... !!!
आखिर कब तक हम इस प्रश्न का उत्तर ढूढ़ते मे रत रहेंगे कि अभी हमारी उम्र ही नहीं ये सब कुछ करने की ...या अभी मेरे पास आर्थिक क्षमता नहीं है समाज के लिए कुछ करने के लिए. जब सब कुछ होगा तब मै कुछ करूँगा समाज के लिए... !!!
"आस- पास" एक छोटा सा प्रयास है व्यक्ति और समाज के हित मे "कुछ" करने के लिए
और कुछ करने के लिए एक नयी सोच देने के लिए और उस सोच को मूर्त रूप देने के लिए प्रयासों का .
क्यों की मेरा मानना है कि एक व्यक्ति कैसे जीता है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है
लेकिन कैसे मरता है इससे फर्क पड़ता है...........
इस प्रगति की गति मे हम सभी की जय हो ...विजय हो ..मंगल हो ........................
और कुछ करने के लिए एक नयी सोच देने के लिए और उस सोच को मूर्त रूप देने के लिए प्रयासों का .
क्यों की मेरा मानना है कि एक व्यक्ति कैसे जीता है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है
लेकिन कैसे मरता है इससे फर्क पड़ता है...........
इस प्रगति की गति मे हम सभी की जय हो ...विजय हो ..मंगल हो ........................
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है आपकी लेखनी के माध्यम से समाज में जय हो मंगल हो
ReplyDeletedhanybaad sir
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