लालच बुरी बला है..
यह एक पुरानी कहावत है । बचपन मे मैने एक कहानी बन्दर और मगरमच्छ की पढ़ी थी। आज आपके लिए यही कहानी लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।
बहुत समय पहले की बात है की एक जंगल मे नदी के किनारे एक पेड़ था पेड़ पर एक बन्दर रहता था और पानी मे भी एक मगरमच्छ रहता था |
बन्दर जंगल के इस पेड़ के मीठे फल को खाता रहता था और हमेसा मस्त रहता था और साथ वो फल को मगर को भी खिलाता था । इससे दोनों मे अच्छी दोस्ती हो गयी थी।
दोनों अक्सर अपने सुख दुख share करते रहते थे। और अपना अकेलापन भी काटते थे। लेकिन मगर धूर्त और काइयाँ भी था। यह बात बन्दर को नहीं पता था वो मगर को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानता था।
एक दिन मगरमच्छ के दिमाग मे एक bad आईडिया आया । उसने सोचा की यह बन्दर इतना मीठा फल खाता है , तो इसका कलेजा कितना मीठा होगा इस पर उसने बन्दर के कलेजे को खाने का प्लान बनाया ।
एक दिन जब बन्दर नदी के किनारे आया तो मगरमच्छ ने अपने plan के अनुसार बन्दर को लालच का एक offer दिया - "बन्दर भाई नदी के उस पार बहुत ही सुन्दर और मीठे फल के पेड़ है लेकिन मैं पेड़ पर नहीं चढ़ सकता हूँ अगर तुम चाहो तो उन फलो का आनंद उठा सकते है।"
बंदर ने पूछा मगर भाई -आप को कैसे पता कि वो फल मीठे है ? मगरमच्छ ने जबाब दिया की मैंने वहाँ के बंदरो को बहुत मजे लेकर फल खाते देखा है और मैंने भी उन फलों को खाया है । और वहाँ के बन्दर मेरे दोस्त भी है लेकिन तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो , तो मैंने सोचा की तुम को भी उनका आनंद उठा लेने का मौका दूँ।
बन्दर के मन भी उन फलों के खाने का लालच आ गया । और उसने मगर की बात पर विश्वास कर लिया। और वो कुछ भी करने को मानसिक रूप से तैयार हो गया । उसने मगरमच्छ से बोला की भाई मे उस पार जाकर उन फलों का स्वाद कैसे ले सकूंगा। इस पर मगर ने बोला – भाई तुम्हारा ये मगर दोस्त किस दिन के लिए है मैं तुम्हे वहाँ ले कर चलता हूँ। आओ मेरी पीठ पर बैठ जाओ।
बन्दर बहुत ही खुश हुआ | वह जाकर मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया । लेकिन नदी की बीच धारा मे पंहुच कर मगर रुक गया और बन्दर से बोला -"तुम इतने मीठे फल खाते हो तो तुम्हारा कलेजा भी खूब मीठा होगा | मैं तुम्हे मार कर तुम्हारा कलेजा खाऊंगा।
यह सुनकर बन्दर बहुत डर गया और बोला भाई मुझको माफ़ कर दो और मुझको छोड़ दो , लेकिन मगरमच्छ नहीं माना और अपनी बात पर अड़ा रहा।
इसके बाद बन्दर ने अपना दिमाग लगाया और मगर से बोला - भाई तुम्हे पहले बोलना था न कि आपको मेरा कलेजा का स्वाद चाहिए मैं आपको दे देता । मै अपना कलेजा पेड़ पर ही भूल आया हूँ । कल ही उसकी साफ सफाई की थी और सूखने के लिए पेड़ पर टांग रखा था जल्दी मे मैं उसको लाना ही भूल गया ।
बेवकूफ मगर ने बन्दर की बात पर विश्वास कर लिया। और वापस पेड़ की ओर चलने लगा ।
किनारे पर पहुचते ही बन्दर उछल कर पेड़ पर चढ़ गया और बोला बेवकूफ मगर आज से तुम्हारी हमारी दोस्ती खत्म । मैं विश्वासघातियों से दोस्ती नहीं रखता ।
निष्कर्ष -
1- बन्दर ने मन ही मन निष्कर्ष निकाला कि लालच बुरी बला है । कभी भी लालच नहीं करना चाहिए। दरअसल किसी भी चीज को पाने की इच्छा में सही और गलत , अच्छे और बुरे का ध्यान न रखना ही लालच का भाव हैं । जिस वस्तु पर हमारा कोई अधिकार न हो उसे पाने की चाह भी हमें लालच के रास्ते की ऒर ले जाती हैं और इस रास्ते से सदैव दूर रहे क्यूंकि यह विनाश का रास्ता हैं । क्यों की बन्दर अगर दिमाग नहीं लगता तो उसकी जान जा सकती थी।लेकिन आज लालच के चक्कर मे रोज अनेको लोग अपनी जान गवाँते है.
2 -लालच का भाव ही मनुष्य को अहित के मार्ग पर ले जाता हैं | चूकि लालच की इच्छा में हमें सही गलत का ज्ञान नहीं रहता बस उसे पाने लालसा होती हैं । ऐसे में वो एक गहरी खाई मे गिरने की तरह है जब पता चलता है कि मै गलत हूँ तो तब वो वापस भी नहीं लौटना कठिन होता है।
3- दूसरे की बात पर सोच समझ कर फैसला लेना चाहिए और अपने मे ही संतुष्ट रहना चाहिए । आज इसी लालच के कारण हजारो लोगकानून तोड़ने और जेल मे कैद की सजा के शिकार हो रहे है । और तो और human trafficking का शिकार होना भी इसी लालच का एक परिणाम है ।
4- हमें किसी के साथ दोस्ती भी सोच समझ कर करना चाहिए । जिससे भी दोस्ती करे उसके बारे मे भुत (past) की कुछ बातों मतलब उसके चाल चलन के बारे मे पता लगा ले।
5- जब कोई एक बार जब कोई लालच में पड़ जाता है तो उसका यह लालच आसानी से खत्म नहीं होता। और उसको पता ही नहीं चलता कि उसे कब रुकना है। अतः लालच की एक CHAIN से बन जाती है.
6-अगर कोई भी लालची होगा तो उसके साथ भी कभी अच्छा नहीं होगा । मगरमच्छ ने भी लालच के कारण अपना एक सच्चा दोस्त खो दिया ।और आज भी इस दोस्ती के कारण आंसू बहा रहा है। यानि नुकसान cheating करने वाले cheater का भी होता है।
6- आस्तीन के साँप से दोस्ती नहीं करनी चाहिए। ऐसे छुपे चेहरे वाले लोग ही आज समाज मे अपराध को अंजाम दे रहे है अतः सतर्क (conscious ) रहे स-तर्क (logical) भी।
यह एक पुरानी कहावत है । बचपन मे मैने एक कहानी बन्दर और मगरमच्छ की पढ़ी थी। आज आपके लिए यही कहानी लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।
बहुत समय पहले की बात है की एक जंगल मे नदी के किनारे एक पेड़ था पेड़ पर एक बन्दर रहता था और पानी मे भी एक मगरमच्छ रहता था |
बन्दर जंगल के इस पेड़ के मीठे फल को खाता रहता था और हमेसा मस्त रहता था और साथ वो फल को मगर को भी खिलाता था । इससे दोनों मे अच्छी दोस्ती हो गयी थी।
दोनों अक्सर अपने सुख दुख share करते रहते थे। और अपना अकेलापन भी काटते थे। लेकिन मगर धूर्त और काइयाँ भी था। यह बात बन्दर को नहीं पता था वो मगर को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानता था।
एक दिन मगरमच्छ के दिमाग मे एक bad आईडिया आया । उसने सोचा की यह बन्दर इतना मीठा फल खाता है , तो इसका कलेजा कितना मीठा होगा इस पर उसने बन्दर के कलेजे को खाने का प्लान बनाया ।
एक दिन जब बन्दर नदी के किनारे आया तो मगरमच्छ ने अपने plan के अनुसार बन्दर को लालच का एक offer दिया - "बन्दर भाई नदी के उस पार बहुत ही सुन्दर और मीठे फल के पेड़ है लेकिन मैं पेड़ पर नहीं चढ़ सकता हूँ अगर तुम चाहो तो उन फलो का आनंद उठा सकते है।"
बंदर ने पूछा मगर भाई -आप को कैसे पता कि वो फल मीठे है ? मगरमच्छ ने जबाब दिया की मैंने वहाँ के बंदरो को बहुत मजे लेकर फल खाते देखा है और मैंने भी उन फलों को खाया है । और वहाँ के बन्दर मेरे दोस्त भी है लेकिन तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो , तो मैंने सोचा की तुम को भी उनका आनंद उठा लेने का मौका दूँ।
बन्दर के मन भी उन फलों के खाने का लालच आ गया । और उसने मगर की बात पर विश्वास कर लिया। और वो कुछ भी करने को मानसिक रूप से तैयार हो गया । उसने मगरमच्छ से बोला की भाई मे उस पार जाकर उन फलों का स्वाद कैसे ले सकूंगा। इस पर मगर ने बोला – भाई तुम्हारा ये मगर दोस्त किस दिन के लिए है मैं तुम्हे वहाँ ले कर चलता हूँ। आओ मेरी पीठ पर बैठ जाओ।
बन्दर बहुत ही खुश हुआ | वह जाकर मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया । लेकिन नदी की बीच धारा मे पंहुच कर मगर रुक गया और बन्दर से बोला -"तुम इतने मीठे फल खाते हो तो तुम्हारा कलेजा भी खूब मीठा होगा | मैं तुम्हे मार कर तुम्हारा कलेजा खाऊंगा।
यह सुनकर बन्दर बहुत डर गया और बोला भाई मुझको माफ़ कर दो और मुझको छोड़ दो , लेकिन मगरमच्छ नहीं माना और अपनी बात पर अड़ा रहा।
इसके बाद बन्दर ने अपना दिमाग लगाया और मगर से बोला - भाई तुम्हे पहले बोलना था न कि आपको मेरा कलेजा का स्वाद चाहिए मैं आपको दे देता । मै अपना कलेजा पेड़ पर ही भूल आया हूँ । कल ही उसकी साफ सफाई की थी और सूखने के लिए पेड़ पर टांग रखा था जल्दी मे मैं उसको लाना ही भूल गया ।
बेवकूफ मगर ने बन्दर की बात पर विश्वास कर लिया। और वापस पेड़ की ओर चलने लगा ।
किनारे पर पहुचते ही बन्दर उछल कर पेड़ पर चढ़ गया और बोला बेवकूफ मगर आज से तुम्हारी हमारी दोस्ती खत्म । मैं विश्वासघातियों से दोस्ती नहीं रखता ।
निष्कर्ष -
1- बन्दर ने मन ही मन निष्कर्ष निकाला कि लालच बुरी बला है । कभी भी लालच नहीं करना चाहिए। दरअसल किसी भी चीज को पाने की इच्छा में सही और गलत , अच्छे और बुरे का ध्यान न रखना ही लालच का भाव हैं । जिस वस्तु पर हमारा कोई अधिकार न हो उसे पाने की चाह भी हमें लालच के रास्ते की ऒर ले जाती हैं और इस रास्ते से सदैव दूर रहे क्यूंकि यह विनाश का रास्ता हैं । क्यों की बन्दर अगर दिमाग नहीं लगता तो उसकी जान जा सकती थी।लेकिन आज लालच के चक्कर मे रोज अनेको लोग अपनी जान गवाँते है.
2 -लालच का भाव ही मनुष्य को अहित के मार्ग पर ले जाता हैं | चूकि लालच की इच्छा में हमें सही गलत का ज्ञान नहीं रहता बस उसे पाने लालसा होती हैं । ऐसे में वो एक गहरी खाई मे गिरने की तरह है जब पता चलता है कि मै गलत हूँ तो तब वो वापस भी नहीं लौटना कठिन होता है।
3- दूसरे की बात पर सोच समझ कर फैसला लेना चाहिए और अपने मे ही संतुष्ट रहना चाहिए । आज इसी लालच के कारण हजारो लोगकानून तोड़ने और जेल मे कैद की सजा के शिकार हो रहे है । और तो और human trafficking का शिकार होना भी इसी लालच का एक परिणाम है ।
4- हमें किसी के साथ दोस्ती भी सोच समझ कर करना चाहिए । जिससे भी दोस्ती करे उसके बारे मे भुत (past) की कुछ बातों मतलब उसके चाल चलन के बारे मे पता लगा ले।
5- जब कोई एक बार जब कोई लालच में पड़ जाता है तो उसका यह लालच आसानी से खत्म नहीं होता। और उसको पता ही नहीं चलता कि उसे कब रुकना है। अतः लालच की एक CHAIN से बन जाती है.
6-अगर कोई भी लालची होगा तो उसके साथ भी कभी अच्छा नहीं होगा । मगरमच्छ ने भी लालच के कारण अपना एक सच्चा दोस्त खो दिया ।और आज भी इस दोस्ती के कारण आंसू बहा रहा है। यानि नुकसान cheating करने वाले cheater का भी होता है।
6- आस्तीन के साँप से दोस्ती नहीं करनी चाहिए। ऐसे छुपे चेहरे वाले लोग ही आज समाज मे अपराध को अंजाम दे रहे है अतः सतर्क (conscious ) रहे स-तर्क (logical) भी।
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