एकाग्रता ही जीवन का सार है
एकाग्र करने की योग्यता यानी एक के प्रति अग्र करने की योग्यता है। जिसने इसको सीख लिया वो जीवन का हर युद्ध लड़ सकता है ।
बहुत समय पहले की बात है चीन मे एक यौद्धा था जो की तलवारबाजी में बहुत निपुड़ था। एक रोज उसने अपने नौकर को अपनी पत्नी के साथ आपत्तिजनक अवस्था मे देख लिया। अपने काबिले की परंपरा के अनुसार यौद्धा ने अपने नौकर को युद्ध की चुनौती दी, कि दोनों मे कोई एक ही जीवित रहेगा।
नौकर को तो तलवारबाजी का क ख ग भी नहीं आता था। पहले तो उसने मालिक को इसके लिए मना किया लेकिन मालिक के जोर देने और कहा कि वह तलवार चलाना नहीं जानता इसलिए उसे कुछ समय दीजिए, ताकि वो किसी के पास जाकर कुछ सीख सके । इस पर योद्धा ने उसे समय लेने पर सहमति जताई । तब नौकर एक अन्य गुरु यौद्धा के पास गया ।
दूसरे योद्धा ने नौकर से कहा, ‘ तुम्हारा स्वामी इस कबीले का सर्वश्रेष्ठ तलवारबाज है बचपन से उसने तलवारबाजी सीखी है .अतः तुम बाकि बचे जीवन मे भी अभ्यास करोगो तो भी तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता है तुम हार जाओगे।
उसने नौकर को सलाह दी कि उसके लिए लड़ाई का यही सही समय है इसमे अंतिम रूप से एक चीज तय है कि तुम्हारी मृत्यु हो जाये । जो कि जीवन का अंतिम सत्य है लेकिन इसके अलावा तुम्हारे पास खोने के लिए और कुछ नहीं है।
लेकिन तुम्हारे master की कई चीजें दांव पर हैं जैसे धन जमीन , पद पत्नी, और सम्मान आदि। चुकि उसका ध्यान इस सब चीजों पर होगा इसलिए वो अपूर्ण ऊर्जा के साथ लड़ रहा होगा लेकिन तुम अपना ध्यान सिर्फ तलवारबाजी पर होगा और तुम्हे अपना पूरा ध्यान लगाना ही पड़ेगा क्यों की जिस पल के लिए तुम्हारा ध्यान भटकेगा, वही तुम्हारे लिए आखिरी पल होगा। अतः बिना किसी कायदे कानून नियम के बारे मे समय गवांये तलवार उठाओ और टूट पड़ो, युद्ध करना शुरु कर दो।
दूसरे दिन ही उसने मालिक को युद्ध की चुनौती दी कि वह युद्ध के लिए तैयार है। योद्धा को विश्वास नहीं हुआ वो मानसिक रुओ से तैयार नहीं था लेकिन मैदान मे आकर युद्ध के किये तैयार हो गया ।
नियमों के अनुसार अभिवादन कर नौकर ने तलवार चलानी शुरू कर दी। मालिक भौच्चका था क्यों की नौकर जहां तलवार का वार कर रहा था वहां कोई एक्सपर्ट सोच नहीं सकता था। जल्द ही योद्धा ने एक कदम पीछे हटा लिए । इस पर नौकर का साहस थोड़ा बढ़ा। उसने बस तलवार चलाने रहने का कार्य किया बिना यह जाने कि क्यों और कैसी लड़ाई लड़ रहा है।
चूकि नौकर अपने मौत के डर से बाहर आ चुका था और उसको पता था कि उसके पास खोने को कुछ नहीं है पाने को बहुत कुछ इसलिए जल्द ही उसने master को हार के करीब ला कर खड़ा कर दिया।
मृत्यु का डर सामने देख कर मास्टर ने अपना सब कुछ देकर संन्यास ग्रहण करने की घोषणा की वह सन्यास के दिनों मे भी यह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर नौकर में यह साहस कहां से आया?
इस कहानी से ये शिक्षा मिलेगी है यह मन की एकाग्रता ही सबसे महत्वपूर्ण तत्व है । वर्तमान मे जीना ही मनुष्य को जागरुक बना देता है और परिस्तिथियों के प्रति क्रिया प्रतिक्रिया सीखा देता है ।
एकाग्र करने की योग्यता यानी एक के प्रति अग्र करने की योग्यता है। जिसने इसको सीख लिया वो जीवन का हर युद्ध लड़ सकता है ।
बहुत समय पहले की बात है चीन मे एक यौद्धा था जो की तलवारबाजी में बहुत निपुड़ था। एक रोज उसने अपने नौकर को अपनी पत्नी के साथ आपत्तिजनक अवस्था मे देख लिया। अपने काबिले की परंपरा के अनुसार यौद्धा ने अपने नौकर को युद्ध की चुनौती दी, कि दोनों मे कोई एक ही जीवित रहेगा।
नौकर को तो तलवारबाजी का क ख ग भी नहीं आता था। पहले तो उसने मालिक को इसके लिए मना किया लेकिन मालिक के जोर देने और कहा कि वह तलवार चलाना नहीं जानता इसलिए उसे कुछ समय दीजिए, ताकि वो किसी के पास जाकर कुछ सीख सके । इस पर योद्धा ने उसे समय लेने पर सहमति जताई । तब नौकर एक अन्य गुरु यौद्धा के पास गया ।
दूसरे योद्धा ने नौकर से कहा, ‘ तुम्हारा स्वामी इस कबीले का सर्वश्रेष्ठ तलवारबाज है बचपन से उसने तलवारबाजी सीखी है .अतः तुम बाकि बचे जीवन मे भी अभ्यास करोगो तो भी तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता है तुम हार जाओगे।
उसने नौकर को सलाह दी कि उसके लिए लड़ाई का यही सही समय है इसमे अंतिम रूप से एक चीज तय है कि तुम्हारी मृत्यु हो जाये । जो कि जीवन का अंतिम सत्य है लेकिन इसके अलावा तुम्हारे पास खोने के लिए और कुछ नहीं है।
लेकिन तुम्हारे master की कई चीजें दांव पर हैं जैसे धन जमीन , पद पत्नी, और सम्मान आदि। चुकि उसका ध्यान इस सब चीजों पर होगा इसलिए वो अपूर्ण ऊर्जा के साथ लड़ रहा होगा लेकिन तुम अपना ध्यान सिर्फ तलवारबाजी पर होगा और तुम्हे अपना पूरा ध्यान लगाना ही पड़ेगा क्यों की जिस पल के लिए तुम्हारा ध्यान भटकेगा, वही तुम्हारे लिए आखिरी पल होगा। अतः बिना किसी कायदे कानून नियम के बारे मे समय गवांये तलवार उठाओ और टूट पड़ो, युद्ध करना शुरु कर दो।
दूसरे दिन ही उसने मालिक को युद्ध की चुनौती दी कि वह युद्ध के लिए तैयार है। योद्धा को विश्वास नहीं हुआ वो मानसिक रुओ से तैयार नहीं था लेकिन मैदान मे आकर युद्ध के किये तैयार हो गया ।
नियमों के अनुसार अभिवादन कर नौकर ने तलवार चलानी शुरू कर दी। मालिक भौच्चका था क्यों की नौकर जहां तलवार का वार कर रहा था वहां कोई एक्सपर्ट सोच नहीं सकता था। जल्द ही योद्धा ने एक कदम पीछे हटा लिए । इस पर नौकर का साहस थोड़ा बढ़ा। उसने बस तलवार चलाने रहने का कार्य किया बिना यह जाने कि क्यों और कैसी लड़ाई लड़ रहा है।
चूकि नौकर अपने मौत के डर से बाहर आ चुका था और उसको पता था कि उसके पास खोने को कुछ नहीं है पाने को बहुत कुछ इसलिए जल्द ही उसने master को हार के करीब ला कर खड़ा कर दिया।
मृत्यु का डर सामने देख कर मास्टर ने अपना सब कुछ देकर संन्यास ग्रहण करने की घोषणा की वह सन्यास के दिनों मे भी यह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर नौकर में यह साहस कहां से आया?
इस कहानी से ये शिक्षा मिलेगी है यह मन की एकाग्रता ही सबसे महत्वपूर्ण तत्व है । वर्तमान मे जीना ही मनुष्य को जागरुक बना देता है और परिस्तिथियों के प्रति क्रिया प्रतिक्रिया सीखा देता है ।
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