Sunday, October 9, 2016

3 छोटी शिक्षाप्रद कहानियां

3  छोटी शिक्षाप्रद कहानियां


कहानी संख्या -1 "रफू वाली सुई"

एक रफू करने वाली सुई को अपने ऊपर बहुत घमंड था वह अपने आप को किसी से कम नहीं समझती थी।

मगर दुर्भाग्य से एक दिन किसी मजबूत कपड़े को रफूू करते वक़्त उसकी आंख फूट गई। इस पर दर्जी महिला ने उस सुई को फेंकने के बजाए उसे अपने जैकेट मे पिन की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

सुई को घमंड मे लगा कि वह सर्वश्रेष्ठ हो गई है । एक दिन सुई जैकेट से निकलकर रसोई के सिंक में जा गिरी और नाली में उसे भ्रम होने लगा कि उसका जन्म नई दुनिया को खोजने के लिए हुआ है।

नालियों में बहते बहते घिस घिस कर सुई बहुत चमकीली हो गई । जल्द ही  उसकी दोस्ती अन्य वस्तुओं से भी हो गई इसमें उसका एक दोस्त बोतल का ढक्कन भी था। दोनों  अक्सऱ बात करते करते फेकते रहते थे ।

एक दिन ढक्कन ने सुई से कहा कि निश्चित रुप से आप एक तलवार है। यह सुन कर सुनकर बोली "तुम बिल्कुल ठीक कर कह रहे हो मैं राजा की तलवार ही हूँ। दुसरी ओर सुई भी ढक्कन को हीरा कह कर बुलाती थी।

इस तरह सुई और बोतल का ढक्कन एक दूसरे से अपने बारे में झूठे किस्से सुनाते रहते और धीरे-धीरे नालियों में झूठ बोलकर अन्य बहने वाली वस्तुओं का भी दिल बहलाते रहते थे

चूकि दोनों की दोस्ती की बुनियाद घमंड और झूठ पर टिकी थी इसलिए वह दोनों अभी तक वहीं पड़े हैं और दोनों भरम मे डूबे हुए है ।

निष्कर्ष - इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि घमंडी और झूठ बोलने वालों का यही हश्र होता है । घमंडी और झूठे लोग सुई और ढक्कन की तरह गंदे नाले में पड़े रहते हैं।
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कहानी संख्या 2- 100 सिर वाला ड्रैगन

एक बार एक राजकुमार एक बार भयानक जंगल से गुजर रहा था तभी उसने सामने से एक ड्रैगन को आते हुए देखा।  यह ड्रैगन 100 सर वाला था । और देखने मे बहुत ही भयानक भी था।

इसके पहले भी राजकुमार कई dragon से लड़ा था और उन्हें हराया था। उनमे कुछ तो बहुत ही  बड़े थे । लेकिन इस राजकुमार के लिए इससे भी लड़ना आसान लगा ।

उसने मन ही मन सोचा इस से जीतना मुश्किल नहीं होगा है अतः उसने इससे लड़ाई की और उसे मार डाला।

राजकुमार सही था क्यों कि सौ सर होने के कारण उसके धड़ का विकास अच्छी तरह नहीं हुआ तथा उससे बड़ी आसानी से हराया जा सकता था ।

कुछ समय बाद राजकुमार को एक और ड्रैगन मिला है जिसका केवल एक सर था लेकिन उसके सौ पैर थे। राजकुमार उस से लड़ने के लिए आगे बढ़ा मगर इस बार इस ड्रैगन ने  राजकुमार को अपने पैरों में फंसा कर मार डाला।

निष्कर्ष - इस कहानी से हमें पता चलता है कि बेहतर है कि हमारे पास सौ पैर हो जो हमारे एक सर का कहना माने और हमारे कहे के अनुसार चले, इसके बजाय कि हमारे पास सौ सिर हो जो हमें आदेश दें।
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कहानी संख्या -3- "जादुई गदा"

एक मेहनती युवक एक  जादूगर के पास नौकर का काम करता था। जब वह वहां से अपने घर वापस जाने लगा तो जादूगर ने उसे उपहार स्वरूप एक गदा ईनाम मे दी    और कहा कि "मारो मारो" कहने पर यह गदा तब तक लोंगो को मारती रहती है जब तक इसे रुक जाओ का आदेश नहीं दिया जाता है ।

उस गदा ने सारे जंगली रास्ते पर उस व्यक्ति की दुष्टो से रक्षा की। एक रात में वह एक सराय में रुका है लेकिन रात मे वहां पर डाकूओ ने आक्रमण कर दिया।   मगर गदा की वजह से उन सब डाकुओं को भागना पड़ा।

युवक के प्रति कृतज्ञ होने के स्थान पर सराय के मालिक का गदा को चोरी करने के बारे में सोचा । ये सारी बातें युवक को पता चल गई और उसने चालाकी से काम लिया वह लेटे लेट सोने का नाटक करने लगा।

जैसे सराय का मालिक गदा चोरी करने आया तो उसने कहा "मारो मारो " और गदा ने सराय के मालिक की जमकर पिटाई की।

अपने देश पहुचने पर उसने देखा कि उसके देश की राजधानी को दुश्मनों ने घेर रखा है और वेा जीतने वाले है।

यह देखकर युवक मैदान मे गया और उसने कहा -मारो मारो ।

गदा ने तुरंत दुश्मन देश के सिपाहियों को मार लगाना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर मे दुश्मन के सारे सिपाही भाग गए ।

राजा को जब यह सब ज्ञात हुआ तो उसने राजकुमारी का हाथ युवक के हाथ मे दे दिया ।

निष्कर्ष- इस कहानी से हमें लगता है कि हम जब भी हम किसी ताकत या शक्ति का प्रयोग लोक या समाज या

सार्वजनिक हित के लिए करेंगे तो वो शक्ति हमारा साथ देगी और उसके साथ हमारा नाम भी रोशन होगा।

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