बचपन की पढ़ी हुई कहानियो का सार बड़े होने पर समझ मे आता है ऐसी कई कहानियों ने मुझे बचपन मे बहुत प्रभावित किया था ऐसी ही एक छोटी सी कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ..
बहुत समय पहले की बात है एक चिड़िया ने मक्के के खेत में अंडे दिए थे. हालांकि उन अंडों से बच्चे निकल आये थे लेकिन अभी छोटे थे और पूरी तरह उड़ना नहीं जानते थे ।
चूंकि फसल पक गयी थी अतः चिड़िया को यह चिंता थी कि कही फसल की कटाई उसके बच्चों के उड़ने लायक होने से पहले ही न हो जाए। इसलिए वह जब भी भोजन ढूंढने जाती तो आपके बच्चों को सतर्क रहने के लिए कहती थी।
एक शाम जब चिड़िया लौटी तो उसने बच्चों को डरा पाया। सबसे छोटे बच्चे ने कहा- माँ, आज खेत के मालिक ने अपने लड़के को फसल काटने के लिए अपने बच्चो से कुछ मजदूर ढूंढ कर ले आने के लिए कहा। यह सुनकर चिड़िया मुस्कुरायी और बोली- चिंता मत करो मेरे बच्चों, कल फसल काटने कोई नहीं आएगा।
और चिड़िया सही थी क्यों कि अगली सुबह फसल काटने कोई भी नहीं आया । जब किसान ने अपने बेटे को फसल काटने के लिए कहा तो बच्चों ने कहा पिताजी !! मजदूर नहीं मिल रहे हैं जब मिल जायेंगे तो फसल कटवा लेंगे।
चिड़िया के बच्चों ने शाम को वापस लौटने पर फिर किसान और उनके पुत्रों की पूरी बातचीत बताई लेकिन समझदार चिड़िया फिर भी परेशान ना हुई।
इस प्रकार कुछ दिन और बीत गए एक दिन चिड़िया ने किसान को अपने बच्चो से कहते सुना -अब बहुत हो गया कल मैं खुद ही फसल की कटाई करूँगा अब मैं दूसरों पर भरोसा नहीं कर सकता हूँ।
यह सुनकर चिड़िया अपने बच्चों से कहा बच्चो अब यह घर छोड़ने का समय आ गया है और उसके साथ ही चिड़िया अपने बच्चो तुरंत वहां से ची ची करती उड़ चली क्योंकि अब उसे पूरा विश्वास था कि अगली सुबह फसल कट ही जाएगी और दूसरे दिन चिड़िया ने आकर देखा तो फसल कट गई थी।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जब तक हम अपना कार्य स्वयं नहीं करेंगे तब तक दूसरा भी हमारे कार्य की तरफ कोई ध्यान नहीं देगा। इसलिए हमें अपना कार्य खुद ही करना चाहिए। तभी तो कहा जाता है अपने कदमो पर आगे बढ़ना ही पुरुषार्थ है।
बहुत समय पहले की बात है एक चिड़िया ने मक्के के खेत में अंडे दिए थे. हालांकि उन अंडों से बच्चे निकल आये थे लेकिन अभी छोटे थे और पूरी तरह उड़ना नहीं जानते थे ।
चूंकि फसल पक गयी थी अतः चिड़िया को यह चिंता थी कि कही फसल की कटाई उसके बच्चों के उड़ने लायक होने से पहले ही न हो जाए। इसलिए वह जब भी भोजन ढूंढने जाती तो आपके बच्चों को सतर्क रहने के लिए कहती थी।
एक शाम जब चिड़िया लौटी तो उसने बच्चों को डरा पाया। सबसे छोटे बच्चे ने कहा- माँ, आज खेत के मालिक ने अपने लड़के को फसल काटने के लिए अपने बच्चो से कुछ मजदूर ढूंढ कर ले आने के लिए कहा। यह सुनकर चिड़िया मुस्कुरायी और बोली- चिंता मत करो मेरे बच्चों, कल फसल काटने कोई नहीं आएगा।
और चिड़िया सही थी क्यों कि अगली सुबह फसल काटने कोई भी नहीं आया । जब किसान ने अपने बेटे को फसल काटने के लिए कहा तो बच्चों ने कहा पिताजी !! मजदूर नहीं मिल रहे हैं जब मिल जायेंगे तो फसल कटवा लेंगे।
चिड़िया के बच्चों ने शाम को वापस लौटने पर फिर किसान और उनके पुत्रों की पूरी बातचीत बताई लेकिन समझदार चिड़िया फिर भी परेशान ना हुई।
इस प्रकार कुछ दिन और बीत गए एक दिन चिड़िया ने किसान को अपने बच्चो से कहते सुना -अब बहुत हो गया कल मैं खुद ही फसल की कटाई करूँगा अब मैं दूसरों पर भरोसा नहीं कर सकता हूँ।
यह सुनकर चिड़िया अपने बच्चों से कहा बच्चो अब यह घर छोड़ने का समय आ गया है और उसके साथ ही चिड़िया अपने बच्चो तुरंत वहां से ची ची करती उड़ चली क्योंकि अब उसे पूरा विश्वास था कि अगली सुबह फसल कट ही जाएगी और दूसरे दिन चिड़िया ने आकर देखा तो फसल कट गई थी।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जब तक हम अपना कार्य स्वयं नहीं करेंगे तब तक दूसरा भी हमारे कार्य की तरफ कोई ध्यान नहीं देगा। इसलिए हमें अपना कार्य खुद ही करना चाहिए। तभी तो कहा जाता है अपने कदमो पर आगे बढ़ना ही पुरुषार्थ है।
No comments:
Post a Comment